शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

भाई दूज की ग़ज़ल

मेरा बीरा मेरा चंदा रहे नीका
यही कहता है भाईदूज का टीका

निभाने प्रीत आ जाना मिरे भैया
ए! राजा बिन तिरे सब कुछ लगे फ़ीका

मैं बाबा से छुपाऊँ लाख ग़म अपना
छुपेगा हाल तुझसे क्या मिरे जी का

लिपाऊँ चौक केसर और चंदन से
तू आए तो जलाऊँ दीप मैं घी का
 
बलाएँ लूँ  दुआएँ दूँ  तुझे लाखों
अमर बनकर रहे सिन्दूर भाभी का
भाई-बहन के अमर त्यौहार भाई-दूज की ढेरों शुभकामनाएँ।
© महावीर सिंह जोधपुर 9413408422

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