शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

एक ग़ज़ल ---लेकर आया

नेह सबूतों की बैसाखी लेकर आया
जग हँसता है प्यार गवाही लेकर आया

यार गले से लगकर भी दिल में दूरी है
मिलने की तू चाहत आधी लेकर आया

सुनलो दिल पर अपने ताला जड़ने वालों
मैं ग़ज़लों में अपनी, चाबी लेकर आया

ख़ाब उजाले का आधा ही रक्खा उसने
दीपक लाया साथ धुँआ भी लेकर आया

ग़म तो भूला होश नहीं लेकिन अब ख़ुद का
कैसी आफ़त साथ शराबी लेकर आया

पागल कहती है दुनिया 'खुरशीद' तुझे क्यों
इक तू ही तो अक़्ल ज़रा सी लेकर आया
©'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर 9413408422

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