शनिवार, 14 अक्टूबर 2017

ग़ज़ल- -आपका हुस्न

22-1212--1122--1212
ज़ुल्फ़ें य' चाँदनी में नहाईं हुई लगे
आँखों को मय अदा की पिलाई हुई लगे

कलियाँ गुलाब की है लबों पर सजी हुई
लाली छितिज की इनमें समाई हुई लगे

रेशम पे हो ज़री का कसीदा किया हुआ
माथे पे कुछ लटें यूँ सजाई हुई लगे

तिरछी कमान सी हैं य' भौहें तनी हुई
गालों पे कैरियाँ ये लजाई हुई लगे

गर्दन पे आपकी जो है सिलवट महीन सी
तलवार मेरे दिल पे उठाई हुई लगे

शायर के ख़ाब सी मिरी जाँ तुम हसीन हो
सूरत ग़ज़ल ख़ुदा की बनाई हुई लगे

उजला जवान हुस्न है पूनम के चाँद सा
मंदिर में कोई जोत जलाई हुई लगे
©'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर। 09413408422

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