दीवाना दिल बात सयानी कहता है
मुस्कानों में आँख का पानी कहता है
नाज़ कराती है कितना दिल की दौलत भी
एक फ़क़ीरा तुझको रानी कहता है
ओ शहज़ादी! तुझको भाएगा कैसे वो
दास कबीरा की जो बानी कहता है
प्यास लगे तो आँसू पीता है शायर
भूख लगे तो बस गुड़-धानी कहता है
सुनते-सुनते आँख लगी जग वालों की
दुखिया अपनी राम कहानी कहता है
नूर सवेरे का आँखों को बतलाकर
वो ज़ुल्फ़ों को शाम सुहानी कहता है
उसके दिल में कितना दर्द जमा होगा
हँसती ग़ज़लें यार ज़ुबानी कहता है
सच बतला 'खुरशीद' हुनर कैसे सिखा
रोते-रोते बात लुभानी कहता है
© 'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर।9413408422
मुस्कानों में आँख का पानी कहता है
नाज़ कराती है कितना दिल की दौलत भी
एक फ़क़ीरा तुझको रानी कहता है
ओ शहज़ादी! तुझको भाएगा कैसे वो
दास कबीरा की जो बानी कहता है
प्यास लगे तो आँसू पीता है शायर
भूख लगे तो बस गुड़-धानी कहता है
सुनते-सुनते आँख लगी जग वालों की
दुखिया अपनी राम कहानी कहता है
नूर सवेरे का आँखों को बतलाकर
वो ज़ुल्फ़ों को शाम सुहानी कहता है
उसके दिल में कितना दर्द जमा होगा
हँसती ग़ज़लें यार ज़ुबानी कहता है
सच बतला 'खुरशीद' हुनर कैसे सिखा
रोते-रोते बात लुभानी कहता है
© 'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर।9413408422
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें