गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017

एक मासूम गज़ल

एक प्यारी सी मासूम ग़ज़ल
अश्कों से भीगी दीवाने की पाती है
पढ़कर दीवानों की आँखें भर आती है

गीत तुम्हारे नाम लिखे हैं मैंने सारे
मेरी सारी ग़ज़लें तुमसे बतियाती है

मैं तुमको क्या हाल सुनाऊँ अपने जी का
मेरे दिल का दर्द सुनो कोयल गाती है 

तुमने गहनों-लत्तों से तोला उल्फ़त को 
प्रीत कहाँ कंकर-पत्थर से तुल पाती है

मेरा तुमसे जो रिश्ता है, इस दुनिया को 
चाँद-चकोरे की जोड़ी कुछ समझाती है 

नील-गगन में बनकर सूरज तुम चमको अब
मेरा जीवन तो बुझती सी इक बाती है 

मेरी आँखों में जगमग करता है जो सच
यार तुम्हारी आँखें उसको झुठलाती है 

महफ़िल-महफ़िल हँसता-गाता बंजारा था
इस दिल को तनहाई अब कितना भाती है 
©महावीर सिंह जोधपुर 9413408422

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