मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017

धन तेरस के दोहे

धन-तेरस के 13 तेरह दोहे........
खोदा मन की खान को, यार बजाकर ढोल ।
गहरे उतरा तब मिला, प्रेम-रतन अनमोल ।।...1

पाया हीरा प्रेम का, गहरे उतरा ठेठ ।
आज जगत में कौन है, मुझसा धन्ना सेठ ।।...2

धन तेरस की भोर में, चमकी मन की खान ।
प्रेम-रतन धन पा गई, मैं निर्धन नादान ।।...3

'मैं' की मिट्टी छानकर, टाले कंकर मोह ।
तब जाकर मुझको मिली, लाल-रतन की टोह ।।...4

सोना सुख का वार दे, नेह-नगद का ढेर ।
चाँदी कितनी चैन की, बाँटे प्रेम-कुबेर ।।...5

मथना मन के सिंधु को, पाल अमृत की आस ।
हाथ लगेगा प्रेम-घट, बुझ जाएगी प्यास ।।...6

धनवन्तरि है प्रेम ही, मेटे सारे रोग ।
प्रेम-विहीना देखलो, रोगी कितने लोग ।।...7

बढ़कर चारों वेद से, प्रेम पाँचवा वेद ।
पड़कर तेरे प्रेम में, हुआ उजागर भेद ।।...8

सच्चा आयुर्वेद है, हर औषध का सार ।
प्रेमासव सब पीजिए, सेहत का भंडार ।।...9

सुख-सुविधाओं का लगे, उस घर में अंबार ।
दारिद्रय सब दूर हो, जिस घर में हो प्यार ।।...10

गहना-लत्ता प्रेम है, प्रेम सकल धन-धान ।
प्रेम बिना निर्धन सभी, प्रेम सुखों की खान ।।...11

मन मोती सा हो अगर, निर्धन के भी पास ।
राजा वो नर हो गया, दुनिया उसकी दास ।।...12

तेरस पावन वार है, कार्तिक पावन माह ।
मिल जाए जब प्रेम-धन, बढ़ जाए उत्साह ।।...13
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर 9413408422
आपको और आपके परिवार को धन-धान्य और आरोग्य के पर्व धन- तेरस की प्रेममयी शुभकामनाएँ।
विनीत
महावीर सिंह और स्नेहिल परिजन।

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