एक परेशान ग़ज़ल....
डोरे-ताँते, जंतर-मंतर करदे कोई
तेरी यादें तीतर-बीतर करदे कोई
भूल गया हूँ अपने तन को तेरा होकर
मुझको फिर से मेरे भीतर करदे कोई
चारागर ख़ुद आकर ज़ह्र मुझे दे जाए
मेरी हालात इतनी बदतर करदे कोई
तीर निगाहों का खेंचा है फिर ज़ालिम ने
मेरे दिल को आज कबूतर करदे कोई
तुझको मेरी सोच भी छूने से कतराए
तुझमें-मुझमें इतना अंतर करदे कोई
क्या हो गर ज़िंदा रहने की कसमें देकर
आती-जाती साँसें नश्तर करदे कोई
जीवन भर काँटों की सेज मिली है मुझको
अर्थी पर फूलों का बिस्तर करदे कोई
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।09413408422
चारागर = डॉक्टर (चिकित्सक)
डोरे-ताँते, जंतर-मंतर करदे कोई
तेरी यादें तीतर-बीतर करदे कोई
भूल गया हूँ अपने तन को तेरा होकर
मुझको फिर से मेरे भीतर करदे कोई
चारागर ख़ुद आकर ज़ह्र मुझे दे जाए
मेरी हालात इतनी बदतर करदे कोई
तीर निगाहों का खेंचा है फिर ज़ालिम ने
मेरे दिल को आज कबूतर करदे कोई
तुझको मेरी सोच भी छूने से कतराए
तुझमें-मुझमें इतना अंतर करदे कोई
क्या हो गर ज़िंदा रहने की कसमें देकर
आती-जाती साँसें नश्तर करदे कोई
जीवन भर काँटों की सेज मिली है मुझको
अर्थी पर फूलों का बिस्तर करदे कोई
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।09413408422
चारागर = डॉक्टर (चिकित्सक)