सोच न लेना तू ऐसा इस
तन्हाई से डर जाऊँगा ।
ज्यादा से ज्यादा क्या होगा
तेरे बिन मैं मर जाऊँगा ।।
तेरी यादों की लहरों से
दिल दिन रात घिरा रहता है ।
डूब रहा हूँ लेकिन इतना
तै है पार उतर जाऊँगा ।।
एक सफ़र है जीवन भी तो
कुछ दिन साथ चलेगें दोनों ।
तू भी अपने घर जाएगी
मैं भी अपने घर जाऊँगा ।।
बस्ती तेरी जंगल तेरा
महफ़िल-महफ़िल तेरा डेरा ।
तुझसे दूर अगर भागा तो
तू ही बोल किधर जाऊँगा ।।
उम्र गुजारी जितनी उससे
ज्यादा घाव सजे हैं दिल पर ।
खाकर ज़ख्म नया इक तुझसे
मैं तो और सँवर जाऊँगा ।।
मेरी मिट्टी पर दुनिया में
चाहे जो अधिकार जताए ।
लेकिन अपनी मीठी यादें
नाम तुम्हारे कर जाऊँगा ।।
मैं 'खुरशीद' लडूँगा दिन भर
इस दुनिया के अँधियारों से ।
ढलते-ढलते इन रातों में
एक उजाला भर जाऊँगा ।।
©'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर ।
तन्हाई से डर जाऊँगा ।
ज्यादा से ज्यादा क्या होगा
तेरे बिन मैं मर जाऊँगा ।।
तेरी यादों की लहरों से
दिल दिन रात घिरा रहता है ।
डूब रहा हूँ लेकिन इतना
तै है पार उतर जाऊँगा ।।
एक सफ़र है जीवन भी तो
कुछ दिन साथ चलेगें दोनों ।
तू भी अपने घर जाएगी
मैं भी अपने घर जाऊँगा ।।
बस्ती तेरी जंगल तेरा
महफ़िल-महफ़िल तेरा डेरा ।
तुझसे दूर अगर भागा तो
तू ही बोल किधर जाऊँगा ।।
उम्र गुजारी जितनी उससे
ज्यादा घाव सजे हैं दिल पर ।
खाकर ज़ख्म नया इक तुझसे
मैं तो और सँवर जाऊँगा ।।
मेरी मिट्टी पर दुनिया में
चाहे जो अधिकार जताए ।
लेकिन अपनी मीठी यादें
नाम तुम्हारे कर जाऊँगा ।।
मैं 'खुरशीद' लडूँगा दिन भर
इस दुनिया के अँधियारों से ।
ढलते-ढलते इन रातों में
एक उजाला भर जाऊँगा ।।
©'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर ।
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