गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

एक लाज़वाब ग़ज़ल

मेरे अज़ीज़ 'खुरशीद' भाई की धमाकेदार वापसी
2122--1212-- 22
चैन मेरा गया तुम्हारा क्या
तुमने मुड़कर मुझे पुकारा क्या

मैंने सारे हिसाब कर डाले
कर्ज़ तुमने भी कुछ उतारा क्या

आ गया फिर मुझे रुलाने वो
आँसुओं को हँसी पे वारा क्या

कोई क़ातिल मिलेगा तुमसा फिर
प्यार होगा मुझे दुबारा क्या

जानते हैं तो जान जाएं सब
मेरे गीतों में है इशारा क्या

ख़ाब था या कोई हक़ीक़त थी
साथ तुमने मिरे गुज़ारा क्या

पूछकर  मेरी हार से देखो
तुमने जीता है खेल सारा क्या

पड़ गई सिलवटें मिरे दिल पर
ज़ुल्फ़ को तुमने फिर सँवारा क्या

टिमटिमाते हो क्यों घटाओं में
तुम भी 'खुरशीद' हो सितारा क्या
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर 9413408422

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