शनिवार, 16 दिसंबर 2017

एक सच्ची ग़ज़ल

मुझ पर तेरा रंग रहेगा
और न कोई संग रहेगा

मेरा सच्चा दीवानापन
देख ज़माना दंग रहेगा

इक दीवाने की आहों से
ध्यान तुम्हारा भंग रहेगा

तेरी उल्फ़त की मय पीकर
मनवा मस्त-मलंग रहेगा

मैं सब कुछ वारूँगा तुम पर
हाथ तुम्हारा तंग रहेगा

अंग लगाले चाहे जिसको
तू मेरा ही अंग रहेगा

ओल्ड य' धरती-अम्बर होंगे
प्यार हमारा यंग रहेगा

तेरी चाहत डोर रहेगी
जीवन एक पतंग रहेगा

तेरी यादों की थापों से
बजता दिल का चंग रहेगा
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।

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