सोमवार, 25 दिसंबर 2017

नई ग़ज़ल

2122--1212--112
प्यार को हादसा समझ लेना
तुम मुझे बेवफ़ा समझ लेना

दिल के इस रोग का इलाज़ नहीं
दर्द को ही दवा समझ लेना

अपनी मंज़िल क़रीब आने पर
मुझको इक रास्ता समझ लेना

क्या बताऊँ मैं हाले दिल तुझको
बेसदा है दुआ समझ लेना

जो भी समझाए तुझको दिल तेरा
उसमें मेरी रज़ा समझ लेना

बंदगी का मज़ा इसी में है
यार को ही ख़ुदा समझ लेना

मीत 'खुरशीद' जब बिछड़ जाए
ज़िंदगी को सज़ा समझ लेना
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।




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