कौन तजे अभिमान को, कौन करे शुरुआत ।
त्योहारों में आजकल, कहाँ प्रेम की बात ? ।।
रंग उड़ा अब नेह का, फीका मेल मिलाप ।
एक सभी की भावना, पहले आओ आप ।।
होली बाल घमण्ड की, और बचा प्रहलाद ।
लो मैं पहले आ गया, लेकर प्रेम प्रसाद ।।
बाँह पसारी हर्ष से, मन में रख अनुराग ।
लो मैं आया खेलने, द्वार तुम्हारे फाग ।।
खुशियों के हो रंग सब, मस्ती-मौज गुलाल ।
आशा गुंझियों से भरा, हो जीवन का थाल ।।
ठण्डाई हो नेह की, बाजे चंग उमंग ।
नाचे हँस-हँस सम्पदा, बिखरे सुख के रंग ।
छोटे हो या हो बड़े, दुश्मन या हो यार ।
सबको हो शुभ साथियों, रंगों का त्यौहार ।।
मिलने को हम हैं विकल, थिरक रहे हैं पैर ।
होली पर मिल लो गले, थूको मन का बैर ।।
©महावीर सिंह जोधपुर
आप सभी को प्रतिभा-महावीर , रिमझिम-रुनझुन की तरफ़ से होली की बहुत बहुत रंग भरी शुभकामनाएँ। धुलंडी का ढ़ेर सारा रंग और गुलाल। साल भर की हुई गल्तियों की क्षमा याचना। हमेशा प्रेम बनाएँ रखें।
निवेदक
समस्त शक्तावत परिवार जोधपुर।
त्योहारों में आजकल, कहाँ प्रेम की बात ? ।।
रंग उड़ा अब नेह का, फीका मेल मिलाप ।
एक सभी की भावना, पहले आओ आप ।।
होली बाल घमण्ड की, और बचा प्रहलाद ।
लो मैं पहले आ गया, लेकर प्रेम प्रसाद ।।
बाँह पसारी हर्ष से, मन में रख अनुराग ।
लो मैं आया खेलने, द्वार तुम्हारे फाग ।।
खुशियों के हो रंग सब, मस्ती-मौज गुलाल ।
आशा गुंझियों से भरा, हो जीवन का थाल ।।
ठण्डाई हो नेह की, बाजे चंग उमंग ।
नाचे हँस-हँस सम्पदा, बिखरे सुख के रंग ।
छोटे हो या हो बड़े, दुश्मन या हो यार ।
सबको हो शुभ साथियों, रंगों का त्यौहार ।।
मिलने को हम हैं विकल, थिरक रहे हैं पैर ।
होली पर मिल लो गले, थूको मन का बैर ।।
©महावीर सिंह जोधपुर
आप सभी को प्रतिभा-महावीर , रिमझिम-रुनझुन की तरफ़ से होली की बहुत बहुत रंग भरी शुभकामनाएँ। धुलंडी का ढ़ेर सारा रंग और गुलाल। साल भर की हुई गल्तियों की क्षमा याचना। हमेशा प्रेम बनाएँ रखें।
निवेदक
समस्त शक्तावत परिवार जोधपुर।
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