सबसे छोटा रुक्न 'फेलुन' इस पर दो रुक्नी ग़ज़ल कहने का सबसे छोटा प्रयास।
चौपाई का अर्धांश "अखंड" छंद।
फेलुन-फेलुन
22--22
प्यार अगर दो
जीवन भर दो
ख़ाब उगा दूँ
दिल बंज़र दो
बोझ ग़मों का
मुझ पर धर दो
तन दरिया है
मन सागर दो
मुझको छूकर
पावन कर दो
पंख दिए हैं
तो अंबर दो
तुमको वर लूँ
ऐसा वर दो
नैन हैं रीते
दर्शन भर दो
जान लुटा दूँ
इक अवसर दो
लोग झुकेंगे
तुम आदर दो
मैं फल दूँगा
तुम पत्थर दो
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।
चौपाई का अर्धांश "अखंड" छंद।
फेलुन-फेलुन
22--22
प्यार अगर दो
जीवन भर दो
ख़ाब उगा दूँ
दिल बंज़र दो
बोझ ग़मों का
मुझ पर धर दो
तन दरिया है
मन सागर दो
मुझको छूकर
पावन कर दो
पंख दिए हैं
तो अंबर दो
तुमको वर लूँ
ऐसा वर दो
नैन हैं रीते
दर्शन भर दो
जान लुटा दूँ
इक अवसर दो
लोग झुकेंगे
तुम आदर दो
मैं फल दूँगा
तुम पत्थर दो
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।
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