बुधवार, 14 मार्च 2018

ग़ज़ल ज़िंदगी आना

मुझसे मिलने भी तू कभी आना
मौत से पहले ज़िन्दगी आना

जान लेकर ही अब तो छोड़ेगा
रात-दिन याद आपकी आना

होश में आप गर कभी आओ
देखने मेरी बेख़ुदी आना

देखिए आपके तसव्वुर से
मेरी ग़ज़लों में ताज़गी आना

दिल को चीरा तो शेर निकले हैं
कोई आसां है शायरी आना

दोस्ती आपको न रास आई
अब निभाने तो दुश्मनी आना

बात 'खुरशीद' ग़ैर मुमकिन है
गुल चराग़ों से रौशनी आना
© खुरशीद खैराड़ी जोधपुर 9413408422

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें