बुधवार, 10 जनवरी 2018

गीत --विदाई

कुछ दिन में घर सूना-सूना हो जाएगा ।।

हर कोने-आले की साज-सजावट तुझको ढूँढ़ेगी
तेरे कमरे में तेरी ही आहट तुझको ढूँढ़ेगी
बोर सवेरा होगा साँझ थकावट तुझको ढूँढ़ेगी
पापा की चिढ़-चिढ़ माँ की झुँझलाहट तुझको ढूँढ़ेगी

मुश्किल परछाई को छूना हो जाएगा ।
कुछ दिन में घर सूना-सूना हो जाएगा ।।

बस इक फाँक हँसी को दिन की सूनी थाली तरसेगी
तेरी बातों की मठरी को चाय की प्याली तरसेगी
तुझको गोद उठाने को इक कुरसी खाली तरसेगी
बुलबुल तेरी चहक-फुदक को डाली-डाली तरसेगी

मरुथल का इक बाग़ नमूना हो जाएगा ।
कुछ दिन में घर सूना सूना हो जाएगा ।।

बालकनी में अखबारों का ढेर लगेगा थोड़े दिन
तन्हाई में भैया सारी रात जगेगा थोड़े दिन
सपनों में भी इस्कूटी का हॉर्न बजेगा थोड़े दिन
सदमा दिल में रसोई के भी हाय! रहेगा थोड़े दिन

सावन में तो ग़म सौ गूना हो जाएगा ।
कुछ दिन में घर सूना सूना हो जाएगा ।।
©महावीर सिंह जोधपुर। 9413408422

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