सोमवार, 22 जनवरी 2018

एक ग़ज़ल बहार पर

आ गई है बहार फूलों पर
छा रहा है ख़ुमार फूलो पर

दिल का भँवरा य' गुनगुनाता है
ख़ुद को करदूँ निसार फूलों पर

ख़ार चुनकर तमाम पलकों से
आपका इंतिज़ार फूलों पर

आपकी इक झलक पड़ी भारी
इस चमन के हज़ार फूलों पर

आइए आपको मैं रक्खूँगा
उम्र भर बेशुमार फूलों पर

मुझको ख़ाबों में रोज़ दिखती है
तितलियों की कतार फूलों पर

आज मेरी ग़ज़ल महकती है
मुझको आया है प्यार फूलों पर

आप हँसकर चमन से गुजरे हो
आ गया है निखार फूलों पर

देखकर आपको क़रार आए
दिल हुआ बेक़रार फूलों पर

नींद आई न रात भर उनको
करवटें ली हज़ार फूलों पर

आइए आप पर कहूँ ग़ज़लें
क्या कहूँ बार-बार फूलों पर

आपकी याद को भुला देगें
मुझको है ऐतिबार फूलों पर

साथ पतझर के ज़िंदगी बीती
क्या कहे ख़ाकसार फूलों पर
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर। 9413408422

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