सक्रांत के दोहे---
माझा तेरे प्रेम का, जीवन एक पतंग ।
नीलगगन आनंद का, मनवा मस्त मलंग ।।
ग़ज़लें मीठी रेवड़ी, तिल-पट्टी से गीत ।
खीच बनाया नेह का, आ जाओ मनमीत ।।
तिल में गुड़ जैसे घुले, दिल में मुझको घोल ।
मीठा हर पल को करे, प्रेम गज़क अनमोल ।।
ढोल बजे ताशे बजे, झाँझर की झणकार ।
पीव मिलन की लोहड़ी, झूम रहा संसार ।।
धूप गुलाबी ओढ़नी, मोती चमके ओस ।
माघ मुहूरत मेल का, प्यारे प्रीत परोस ।।
©महावीर सिंह जोधपुर।
माझा तेरे प्रेम का, जीवन एक पतंग ।
नीलगगन आनंद का, मनवा मस्त मलंग ।।
ग़ज़लें मीठी रेवड़ी, तिल-पट्टी से गीत ।
खीच बनाया नेह का, आ जाओ मनमीत ।।
तिल में गुड़ जैसे घुले, दिल में मुझको घोल ।
मीठा हर पल को करे, प्रेम गज़क अनमोल ।।
ढोल बजे ताशे बजे, झाँझर की झणकार ।
पीव मिलन की लोहड़ी, झूम रहा संसार ।।
धूप गुलाबी ओढ़नी, मोती चमके ओस ।
माघ मुहूरत मेल का, प्यारे प्रीत परोस ।।
©महावीर सिंह जोधपुर।
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