शनिवार, 27 जनवरी 2018

ग़ज़ल रहेगा क्या अब

हाल ऐसा ही रहेगा क्या अब
दिल य' रोता ही रहेगा क्या अब

दास्तां छोड़ गए हो आधी
चाँद आधा ही रहेगा क्या अब

देखने को तेरी इस दुनिया में
उनका चेहरा ही रहेगा क्या अब

आपने हाल न पूछा मुड़कर
कोई ज़िंदा ही रहेगा क्या अब

नफ़रतों से है मिरा इक ही सवाल
प्यार किस्सा ही रहेगा क्या अब

आँधियाँ हार गई हैं सारी
दीप जलता ही रहेगा क्या अब

चौंक जाता हूँ हर इक आहट पर
मुझको धोखा ही रहेगा क्या अब

मेरी आँखों प' तरस तो खाओ
रुख प' परदा ही रहेगा क्या अब

उनसे कह दो कि बता दे अंज़ाम
कोई उनका ही रहेगा क्या अब

मेरी बातों में मेरी ग़ज़लों में
तेरा चर्चा ही रहेगा क्या अब

बहते हैं गीत लबों पर दिन रात
ज़ख्म रिसता ही रहेगा क्या अब

अश्क़ 'खुरशीद' छुपाकर अपने
यूँ ही हँसता ही रहेगा क्या अब
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।



सोमवार, 22 जनवरी 2018

एक ग़ज़ल बहार पर

आ गई है बहार फूलों पर
छा रहा है ख़ुमार फूलो पर

दिल का भँवरा य' गुनगुनाता है
ख़ुद को करदूँ निसार फूलों पर

ख़ार चुनकर तमाम पलकों से
आपका इंतिज़ार फूलों पर

आपकी इक झलक पड़ी भारी
इस चमन के हज़ार फूलों पर

आइए आपको मैं रक्खूँगा
उम्र भर बेशुमार फूलों पर

मुझको ख़ाबों में रोज़ दिखती है
तितलियों की कतार फूलों पर

आज मेरी ग़ज़ल महकती है
मुझको आया है प्यार फूलों पर

आप हँसकर चमन से गुजरे हो
आ गया है निखार फूलों पर

देखकर आपको क़रार आए
दिल हुआ बेक़रार फूलों पर

नींद आई न रात भर उनको
करवटें ली हज़ार फूलों पर

आइए आप पर कहूँ ग़ज़लें
क्या कहूँ बार-बार फूलों पर

आपकी याद को भुला देगें
मुझको है ऐतिबार फूलों पर

साथ पतझर के ज़िंदगी बीती
क्या कहे ख़ाकसार फूलों पर
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर। 9413408422

शनिवार, 20 जनवरी 2018

ताज़ा ग़ज़ल

मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है
मरज़ ठीक होगा नहीं लग रहा है

मेरी बेक़रारी हुई चैन उसका
ये सौदा तो महँगा नहीं लग रहा है

बहलने लगा है उधर दिल किसी का
इधर दिल किसी का नहीं लग रहा है

भुलाना है तो भूल जाओ मुझे तुम
मेरा तो इरादा नहीं लग रहा है

क़रीब इतना है वो कि सुनता है धड़कन
सदाएँ सुनेगा नहीं लग रहा है

तिरा प्यार ओढ़ा है जबसे बदन पर
कोई रंग फीका नहीं लग रहा है

शिकन तेरे माथे पे आई है क्यों कर
मेरा दिल तो टूटा नहीं लग रहा है

वो जो चाँद है-जैसे चेहरा है तेरा
फ़लक आइने सा नहीं लग रहा है?

कोई अज़नबी शह्र में खो गया हो
मेरा हाल ऐसा नहीं लग रहा है?

गले बारहा मिल रहा है सभी से
वो महफ़िल में तनहा नहीं लग रहा है

जो 'खुरशीद' लगता था इस आसमां पर
ज़मीं पर वो ज़र्रा नहीं लग रहा है
©'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर।

रविवार, 14 जनवरी 2018

दोहे संक्रांत

सक्रांत के दोहे---
माझा तेरे प्रेम का, जीवन एक पतंग ।
नीलगगन आनंद का, मनवा मस्त मलंग ।।

ग़ज़लें मीठी रेवड़ी, तिल-पट्टी से गीत ।
खीच बनाया नेह का, आ जाओ मनमीत ।।

तिल में गुड़ जैसे घुले, दिल में मुझको घोल ।
मीठा हर पल को करे, प्रेम गज़क अनमोल ।।

ढोल बजे ताशे बजे, झाँझर की झणकार ।
पीव मिलन की लोहड़ी, झूम रहा संसार ।।

धूप गुलाबी ओढ़नी, मोती चमके ओस ।
माघ मुहूरत मेल का, प्यारे प्रीत परोस ।।
©महावीर सिंह जोधपुर।

शनिवार, 13 जनवरी 2018

मोह लगा रक्खा है

हमने भी किस दुश्वारी से मोह लगा रक्खा है
रेशम होकर चिंगारी से मोह लगा रक्खा है

चाहें तो अच्छे हो जाएं लेकिन चाह नहीं अब
दिल ने दिल की बीमारी से मोह लगा रक्खा है

काम तो इतने हैं जीवन भर साँस न लेने पाएं
फ़ुर्सत में हैं बेकारी से मोह लगा रक्खा है

कीड़े ही चाटेंगे उन कपड़ों की ज़रदोज़ी को
जिन कपड़ों ने अलमारी से मोह लगा रक्खा है

आवारा मन छोड़ आया है बस्ती सच्चाई की
कुछ सपनों की सरदारी से मोह लगा रक्खा है

इक तितली के सपनों की ख़ातिर मन के आँचल ने
काँटें चुनकर फुलवारी से मोह लगा रक्खा है

दूर उदासी को करने के सामां हैं पग-पग पर
फिर भी मन ने बेज़ारी से मोह लगा रक्खा है

मेरे अहसासों की तुझको क़द्र नहीं है कुछ भी
मैंने क्यों तेरी यारी से मोह लगा रक्खा है

चाँदी के पलड़े में मोल वफ़ा का तोले है वो
इस दिल ने इक व्यापारी से मोह लगा रक्खा है
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।
बेज़ारी-अप्रसन्नता
दुश्वारी-मुश्किल


बुधवार, 10 जनवरी 2018

गीत --विदाई

कुछ दिन में घर सूना-सूना हो जाएगा ।।

हर कोने-आले की साज-सजावट तुझको ढूँढ़ेगी
तेरे कमरे में तेरी ही आहट तुझको ढूँढ़ेगी
बोर सवेरा होगा साँझ थकावट तुझको ढूँढ़ेगी
पापा की चिढ़-चिढ़ माँ की झुँझलाहट तुझको ढूँढ़ेगी

मुश्किल परछाई को छूना हो जाएगा ।
कुछ दिन में घर सूना-सूना हो जाएगा ।।

बस इक फाँक हँसी को दिन की सूनी थाली तरसेगी
तेरी बातों की मठरी को चाय की प्याली तरसेगी
तुझको गोद उठाने को इक कुरसी खाली तरसेगी
बुलबुल तेरी चहक-फुदक को डाली-डाली तरसेगी

मरुथल का इक बाग़ नमूना हो जाएगा ।
कुछ दिन में घर सूना सूना हो जाएगा ।।

बालकनी में अखबारों का ढेर लगेगा थोड़े दिन
तन्हाई में भैया सारी रात जगेगा थोड़े दिन
सपनों में भी इस्कूटी का हॉर्न बजेगा थोड़े दिन
सदमा दिल में रसोई के भी हाय! रहेगा थोड़े दिन

सावन में तो ग़म सौ गूना हो जाएगा ।
कुछ दिन में घर सूना सूना हो जाएगा ।।
©महावीर सिंह जोधपुर। 9413408422