हाल ऐसा ही रहेगा क्या अब
दिल य' रोता ही रहेगा क्या अब
दास्तां छोड़ गए हो आधी
चाँद आधा ही रहेगा क्या अब
देखने को तेरी इस दुनिया में
उनका चेहरा ही रहेगा क्या अब
आपने हाल न पूछा मुड़कर
कोई ज़िंदा ही रहेगा क्या अब
नफ़रतों से है मिरा इक ही सवाल
प्यार किस्सा ही रहेगा क्या अब
आँधियाँ हार गई हैं सारी
दीप जलता ही रहेगा क्या अब
चौंक जाता हूँ हर इक आहट पर
मुझको धोखा ही रहेगा क्या अब
मेरी आँखों प' तरस तो खाओ
रुख प' परदा ही रहेगा क्या अब
उनसे कह दो कि बता दे अंज़ाम
कोई उनका ही रहेगा क्या अब
मेरी बातों में मेरी ग़ज़लों में
तेरा चर्चा ही रहेगा क्या अब
बहते हैं गीत लबों पर दिन रात
ज़ख्म रिसता ही रहेगा क्या अब
अश्क़ 'खुरशीद' छुपाकर अपने
यूँ ही हँसता ही रहेगा क्या अब
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।
दिल य' रोता ही रहेगा क्या अब
दास्तां छोड़ गए हो आधी
चाँद आधा ही रहेगा क्या अब
देखने को तेरी इस दुनिया में
उनका चेहरा ही रहेगा क्या अब
आपने हाल न पूछा मुड़कर
कोई ज़िंदा ही रहेगा क्या अब
नफ़रतों से है मिरा इक ही सवाल
प्यार किस्सा ही रहेगा क्या अब
आँधियाँ हार गई हैं सारी
दीप जलता ही रहेगा क्या अब
चौंक जाता हूँ हर इक आहट पर
मुझको धोखा ही रहेगा क्या अब
मेरी आँखों प' तरस तो खाओ
रुख प' परदा ही रहेगा क्या अब
उनसे कह दो कि बता दे अंज़ाम
कोई उनका ही रहेगा क्या अब
मेरी बातों में मेरी ग़ज़लों में
तेरा चर्चा ही रहेगा क्या अब
बहते हैं गीत लबों पर दिन रात
ज़ख्म रिसता ही रहेगा क्या अब
अश्क़ 'खुरशीद' छुपाकर अपने
यूँ ही हँसता ही रहेगा क्या अब
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर।