बुधवार, 14 जून 2017

न डरियो

ग़ज़ल 'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर 9413408422

खरी बात कहने से बिटिया न डरियो
डरे को डराती है दुनिया न डरियो

फ़लक की बुलंदी छलावा है खाली
परों को फैलाकर ए चिड़िया न डरियो

यकीं इतना रखियो य' दुनिया है बढ़िया
मिलेगें कई लोग घटिया न डरियो

बुरा है अगर वक़्त अच्छा भी होगा
ठहर घूम जाएगा पहिया न डरियो

है पतवार हिम्मत इरादा सफ़ीना
उफ़न कर उतरता है दरिया न डरियो

भलाई के छींटे गला देगें इसको
बुराई है कागज़ की पुड़िया न डरियो

झुका दे जो तुझको नहीं दम किसी में
ए राधा , ए मरियम , ए रज़िया न डरियो

नहीं जीतता है कभी झूठ सच से
कई रूप बदलेगा छलिया न डरियो

ए 'खुरशीद' तुझको सवेरा है लाना
तुझे घेर ले गर बदरिया न डरियो
©खुरशीद खैराड़ी जोधपुर



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें