सियासी जतन धरे रह गए
मेरे जख्म फिर हरे रह गए
कहीं लब तरस गए बूंद को
कहीं जाम बस भरे रह गए
बरी हो गए हैं खोटे सभी
फँसे जाँच में खरे रह गए
चला बाण फिर नयन से ज़रा
कई लोग अधमरे रह गए
उन्हीं ने दिया नहीं आसरा
यहाँ जिनके आसरे रह गए
अजी इक हमीं तो तैराक थे
भँवर में हमीं अरे रह गए
न 'खुरशीद' ने उजाला किया
उलट सब मुहावरे रह गए
परिंदे जून-जुलाई २०१३,
खुरशीद'खैराड़ी' जोधपुर ०९४१३४०८४२२
मेरे जख्म फिर हरे रह गए
कहीं लब तरस गए बूंद को
कहीं जाम बस भरे रह गए
बरी हो गए हैं खोटे सभी
फँसे जाँच में खरे रह गए
चला बाण फिर नयन से ज़रा
कई लोग अधमरे रह गए
उन्हीं ने दिया नहीं आसरा
यहाँ जिनके आसरे रह गए
अजी इक हमीं तो तैराक थे
भँवर में हमीं अरे रह गए
न 'खुरशीद' ने उजाला किया
उलट सब मुहावरे रह गए
परिंदे जून-जुलाई २०१३,
खुरशीद'खैराड़ी' जोधपुर ०९४१३४०८४२२
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