गुरुवार, 27 जनवरी 2022

ग़ज़ल: देखने में तो सरल लगती है

 2122 - 1122 - 22

देखने में तो सरल लगती है।

ज़िन्दगी फिर भी पज़ल लगती है।


एक लड़की है मेरे ख़्वाबों में,

झील में खिलता कँवल लगती है।


संगेमरमर सा बदन है उसका,

दूर से ताजमहल लगती है।


दर्द की बह्र हज़ज है शायद,

मेरी हर आह ग़ज़ल लगती है।


हिज्र की रात गुज़रती ही नहीं,

एक लंबी सी टनल लगती है।


कैसे जीते हैं न पूछो हमसे,

ज़िंदगी एक जदल लगती है।


रौशनी भी तेरी 'ख़ुरशीद' हमें,

तीरगी की ही नक़ल लगती है।

©'ख़ुरशीद' खैराड़ी, जोधपुर।

9001198483

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