ज़ख्म देगा वही दवा देगा
बेवफ़ा दर्द फिर नया देगा
बाइरादा कदम बढ़ाना तुम
देखना कोह रास्ता देगा
ठोकरों का ये सिल्सिला तुमको
देखना दौड़ना सिखा देगा
भूख को वो बनाएगा मुद्दा
खेत पहले सभी जला देगा
पढ़ना ‘खुरशीद’ की ग़ज़ल ग़म में
उसका हर शेर हौंसला देगा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें