अपनी ही जुस्तजू में तिरी दोस्ती सही
तब्दीलियों में तेरी मिरी शायरी सही
तब्दीलियों में तेरी मिरी शायरी सही
मैंने ही रेगज़ार में चश्मे किये तलाश
मैंने ही ताहयात मगर तिश्नगी सही
मैंने ही ताहयात मगर तिश्नगी सही
अच्छा हरेक ध्यान है निर्गुण हो या सगुण
साकार के सफ़र पे चलें दिल्लगी सही
साकार के सफ़र पे चलें दिल्लगी सही
सब लोग ख़स्ताहाल हैं सबको मलाल है
महँगाई ने निचोड़ दीं साँसें रही सही
महँगाई ने निचोड़ दीं साँसें रही सही
हालात बार बार मुझे तोड़ते रहे
पत्थर था, ख़ाकसार हुआ, ज़िन्दगी सही
पत्थर था, ख़ाकसार हुआ, ज़िन्दगी सही
लोबान बनके रोज़ मेरे ख़्वाब जलते हैं
खुशबू मिरी ग़ज़ल में इसी से हुई सही
खुशबू मिरी ग़ज़ल में इसी से हुई सही
‘खुरशीद’ शेर कहता है कमज़ोर…नाम के ?
‘अच्छा ये आप समझे है अच्छा यही सही ‘
‘अच्छा ये आप समझे है अच्छा यही सही ‘
महावीर सिंह ‘खुरशीद’ खैराड़ी जोधपुर 09413408422
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