बुधवार, 4 दिसंबर 2013

आ.नवीन सी .चतुर्वेदी के ब्लॉग ठाले बैठे पर मेरे कुछ हिंदी दोहे विषय 'नवरात्री '

राम घरों में सो रहे ,रावण है मुस्तैद
भोग रही है जानकी, युगों युगों से कैद

जगजननी जगदम्ब की, क्यूं है मक़तल कोख
मूरत को गलहार है, औरत को क्यूं तौक़

दीप जलाकर रोशनी, घर घर होती आज
फिर भी क्यूं अंधकार का, घट घट में राज

सदियों से रावण दहन की है अच्छी रीत
फिर भी होती है बुरे लोगों की ही जीत

रोशन सारा देश है, जगमग जलते दीप
लेकिन अब भी गाँव है, अंधियारे के द्वीप

घर घर में आराधना, जिसकी करते लोग
उस देवी की दुर्दशा, देख हुआ है सोग

भूखे नंगे लोग है, गूंगी हर आवाज़
ग़ुरबत रावण हो गई, कौन करे आगाज़

दुर्गा दुर्गति नाशती, देती है सद्ज्ञान
फिर भी हम बन कर महिष,करते हैं अपमान

अंधियारे को जीतना, तुझको है 'खुरशीद'
जगमग करती भोर ही, तव दीवाली ईद

तौक़-कैदियों के गले में डालने की हँसली

खुरशीद 'खैराड़ी' जोधपुर ०९४१३४०८४२२

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