इक्कीस दिन का सामाजिक अलगाव है इसलिए कोरोना के इक्कीस दोहे समर्पित हैं।
*कोरोना--इक्कीसी*
कोरोना के रोग का, केवल एक बचाव ।
घर में रहकर हो सफल, सामाजिक अलगाव ।।...1
दूरी मज़बूरी बनी, पास न आना यार ।
तेरे मेरे बीच में, कोरोना दीवार ।।...2
घर में दुबके आदमी, खाली हर दालान ।
गलियों के सब जानवर, देख हुए हैरान ।।...3
भोर हुई कलरव सुना, साँझ हुई गौ नाद ।
शोर थमा इंसान का, कुदरत से संवाद ।।...4
सड़कें सूनी हो गईं, चौराहे सुनसान ।
बेरौनक बाज़ार सब, आज बने मैदान ।।...5
राम-भरोसा ना रहा, मनवा हुआ उचाट ।
बैठा है भगवान भी, करके बंद कपाट ।।...6
महँगे वाले मॉल वो, सस्ते वाला हाट ।
बंद हुए होटल सभी, चौपाटी का चाट ।।...7
तीर्थ सभी सूने हुए, सूने सारे घाट ।
माला राखो हाथ में, पकड़ो घर की खाट ।।...8
मंगल-बुध-गुरु-शुक्र-शनि, सोम हुए बेकार ।
दफ़्तर में ताला जड़ा, हर दिन है इतवार ।।...9
साफ़ हुई आबोहवा, शांत हुआ हर शोर ।
दिखता है इस छोर से, पास बहुत वो छोर ।।...10
सड़कों ने कुछ साँस ली, बादल उड़े कपास ।
चहल-पहल तक रुक गई, गलियाँ हुईं उदास ।...11
नीलगगन उजला हुआ, धूल-धुँए से मुक्त ।
महका फिर वातावरण, ऑक्सीजन से युक्त ।।...12
सारे पहिये थम गए, सुस्त हुई रफ़्तार ।
रस्ते हैं राही नहीं, सिमटे कारोबार ।।...13
जित देखो उत थी कभी, केवल भागमभाग ।
पलटी मारी वक़्त ने, हुआ अचेत दिमाग ।।...14
चंद्रयान मंगल-मिशन, सपनों में आकास ।
आज धराशायी हुई, नर की ऊँची आस ।।...15
फ़ुर्सत के पल थे कहाँ, व्यस्त बड़े थे लोग ।
वक़्त काटना अब कठिन, है कैसा संजोग ।।...16
घर से बाहर भी कभी, था अपना संसार ।
घर ही अब संसार है, सिमटा हर विस्तार ।।...17
पंछी लौटे नीड़ को, लड़के आए गाँव ।
सबको अब अच्छी लगे, अपनी-अपनी ठाँव ।।...18
भटका बहुत गली-गली, पाया नहीं करार ।
घर में आकर जोगिया, अपनी जूण सुधार ।।...19
सारी दुनिया घूम ली, पाया घर में चैन ।।
उजली घर की भोर है, सुखकर घर की रैन ।।...20
मानव ने कितना किया, कुदरत से खिलवाड़ ।
कुदरत ने झट चित किया, धोबी पटक पछाड़ ।।...21
©कृते -- महावीर सिंह जोधपुर 9413408422
*कोरोना--इक्कीसी*
कोरोना के रोग का, केवल एक बचाव ।
घर में रहकर हो सफल, सामाजिक अलगाव ।।...1
दूरी मज़बूरी बनी, पास न आना यार ।
तेरे मेरे बीच में, कोरोना दीवार ।।...2
घर में दुबके आदमी, खाली हर दालान ।
गलियों के सब जानवर, देख हुए हैरान ।।...3
भोर हुई कलरव सुना, साँझ हुई गौ नाद ।
शोर थमा इंसान का, कुदरत से संवाद ।।...4
सड़कें सूनी हो गईं, चौराहे सुनसान ।
बेरौनक बाज़ार सब, आज बने मैदान ।।...5
राम-भरोसा ना रहा, मनवा हुआ उचाट ।
बैठा है भगवान भी, करके बंद कपाट ।।...6
महँगे वाले मॉल वो, सस्ते वाला हाट ।
बंद हुए होटल सभी, चौपाटी का चाट ।।...7
तीर्थ सभी सूने हुए, सूने सारे घाट ।
माला राखो हाथ में, पकड़ो घर की खाट ।।...8
मंगल-बुध-गुरु-शुक्र-शनि, सोम हुए बेकार ।
दफ़्तर में ताला जड़ा, हर दिन है इतवार ।।...9
साफ़ हुई आबोहवा, शांत हुआ हर शोर ।
दिखता है इस छोर से, पास बहुत वो छोर ।।...10
सड़कों ने कुछ साँस ली, बादल उड़े कपास ।
चहल-पहल तक रुक गई, गलियाँ हुईं उदास ।...11
नीलगगन उजला हुआ, धूल-धुँए से मुक्त ।
महका फिर वातावरण, ऑक्सीजन से युक्त ।।...12
सारे पहिये थम गए, सुस्त हुई रफ़्तार ।
रस्ते हैं राही नहीं, सिमटे कारोबार ।।...13
जित देखो उत थी कभी, केवल भागमभाग ।
पलटी मारी वक़्त ने, हुआ अचेत दिमाग ।।...14
चंद्रयान मंगल-मिशन, सपनों में आकास ।
आज धराशायी हुई, नर की ऊँची आस ।।...15
फ़ुर्सत के पल थे कहाँ, व्यस्त बड़े थे लोग ।
वक़्त काटना अब कठिन, है कैसा संजोग ।।...16
घर से बाहर भी कभी, था अपना संसार ।
घर ही अब संसार है, सिमटा हर विस्तार ।।...17
पंछी लौटे नीड़ को, लड़के आए गाँव ।
सबको अब अच्छी लगे, अपनी-अपनी ठाँव ।।...18
भटका बहुत गली-गली, पाया नहीं करार ।
घर में आकर जोगिया, अपनी जूण सुधार ।।...19
सारी दुनिया घूम ली, पाया घर में चैन ।।
उजली घर की भोर है, सुखकर घर की रैन ।।...20
मानव ने कितना किया, कुदरत से खिलवाड़ ।
कुदरत ने झट चित किया, धोबी पटक पछाड़ ।।...21
©कृते -- महावीर सिंह जोधपुर 9413408422