बुधवार, 16 सितंबर 2020

एक ग़ज़ल ओके

 एक ग़ज़ल, पहली बार प्रयुक्त रदीफ़ 'ओके' के साथ। एक प्रयोग आप सभी के आशीष का अभिलाषी।

आँखों पर पट्टी, होंठों पर ताला रक्खेंगे ओके !

हम इतिहास हमारे युग का काला रक्खेंगे ओके !


तेरे जयकारे बोलेंगे पीर हमारी बिसराकर,

आज छुपाकर अपने उर का छाला रक्खेंगे ओके !


जिस थाली में खाए छेद न उसमें कर पाए कोई,

हर थाली में विष का एक निवाला रक्खेंगे ओके !


तेरी चालीसा गाएंगे हर चैनल पर आकर हम,

हर आखर बालेंगे, बंद रिसाला रक्खेंगे ओके !


बिजली, पानी, रोटी, कपड़ा, रोज़ी चाहत है किसकी,

सर पर झंडा, बैनर एक दुशाला रक्खेंगे ओके !


मीलों पर ताले जड़ देंगे, हर इस्कूल रखेंगे बंद ,

मस्त रहें सब रिंद खुली मधुशाला रक्खेंगे ओके !


तू है चोर लुटेरा जाँच परख कर मान लिया सबने,

डर मत ! तुझको बस्ती का रखवाला रक्खेंगे ओके !


मरणासन्न विधायक जी को चमचों ने आश्वस्त किया,

हाथ में माइक और गले में माला रक्खेंगे ओके !


लाएंगे इक भोर उजाले वाली, अँधियारे में भी,

यूँ 'ख़ुरशीद' जी अपना दर्जा आला रक्खेंगे ओके !

©'ख़ुरशीद' खैराड़ी । जोधपुर ।

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

इक्कीस दिन का सामाजिक अलगाव है इसलिए कोरोना के इक्कीस दोहे समर्पित हैं।
*कोरोना--इक्कीसी*
कोरोना के रोग का, केवल एक बचाव ।
घर में रहकर हो सफल, सामाजिक अलगाव ।।...1

दूरी मज़बूरी बनी, पास न आना यार ।
तेरे मेरे बीच में, कोरोना दीवार ।।...2

घर में दुबके आदमी, खाली हर दालान ।
गलियों के सब जानवर, देख हुए हैरान ।।...3

भोर हुई कलरव सुना, साँझ हुई गौ नाद ।
शोर थमा इंसान का, कुदरत से संवाद ।।...4

सड़कें सूनी हो गईं, चौराहे सुनसान ।
बेरौनक बाज़ार सब, आज बने मैदान ।।...5

राम-भरोसा ना रहा, मनवा हुआ उचाट ।
बैठा है भगवान भी, करके बंद कपाट ।।...6

महँगे वाले मॉल वो, सस्ते वाला हाट ।
बंद हुए होटल सभी, चौपाटी का चाट ।।...7

तीर्थ सभी सूने हुए, सूने सारे घाट ।
माला राखो हाथ में, पकड़ो घर की खाट ।।...8

मंगल-बुध-गुरु-शुक्र-शनि, सोम हुए बेकार ।
दफ़्तर में ताला जड़ा, हर दिन है इतवार ।।...9

साफ़ हुई आबोहवा, शांत हुआ हर शोर ।
दिखता है इस छोर से, पास बहुत वो छोर ।।...10

सड़कों ने कुछ साँस ली, बादल उड़े कपास ।
चहल-पहल तक रुक गई, गलियाँ हुईं उदास ।...11

नीलगगन उजला हुआ, धूल-धुँए से मुक्त ।
महका फिर वातावरण, ऑक्सीजन से युक्त ।।...12

सारे पहिये थम गए, सुस्त हुई रफ़्तार ।
रस्ते हैं राही नहीं, सिमटे कारोबार ।।...13

जित देखो उत थी कभी, केवल भागमभाग ।
पलटी मारी वक़्त ने, हुआ अचेत दिमाग ।।...14

चंद्रयान मंगल-मिशन, सपनों में आकास ।
आज धराशायी हुई, नर की ऊँची आस ।।...15

फ़ुर्सत के पल थे कहाँ, व्यस्त बड़े थे लोग ।
वक़्त काटना अब कठिन, है कैसा संजोग ।।...16

घर से बाहर भी कभी, था अपना संसार ।
घर ही अब संसार है, सिमटा हर विस्तार ।।...17

पंछी लौटे नीड़ को, लड़के आए गाँव ।
सबको अब अच्छी लगे, अपनी-अपनी ठाँव ।।...18

भटका बहुत गली-गली, पाया नहीं करार ।
घर में आकर जोगिया, अपनी जूण सुधार ।।...19

सारी दुनिया घूम ली, पाया घर में चैन ।।
उजली घर की भोर है, सुखकर घर की रैन ।।...20

मानव ने कितना किया, कुदरत से खिलवाड़ ।
कुदरत ने झट चित किया, धोबी पटक पछाड़ ।।...21
©कृते -- महावीर सिंह जोधपुर 9413408422

मंगलवार, 24 मार्च 2020

कोरोना-चालीसा

*कोरोना--चालीसा* (छंद-चौपाई)
दोहा--
*साँसें लेना हो दुभर, खाँसी तेज़ बुखार* ।
*सिर में भी हो दर्द यदि, लेवें झट उपचार* ।।
चौपाई--
चीन देश से विपदा आई । कोरोना जो नाम धराई ।।
सारे जग में फैली झटपट । मानवता पर छाया संकट ।।
फैल रही है जो अब घर-घर । सबके मन में इसका ही डर ।।
लील गई है जो इटली को । अमेरिका भी आज रहा रो ।।
सौ-सौ मौतें होती हर दिन । डॉक्टर काँपे लाशें गिन-गिन ।।
काँप रहा ईरान अभी तक । स्पेन गया लड़ते-लड़ते थक ।।
ज़हर हवा में ऐसा फैला । विश्व हुआ सारा ही मैला ।।
जित देखो उत मची तबाही । कोरोना ने आँख दिखाई ।।
छूने से जो फैले आगे । दूर रहे वो जिसको लागे ।।
रूस-फ्रांस भी बेकल बेबस । कौन बँधाए किसको ढाँढ़स ।।
दोहा--
*आए भारत भूमि में, कुछ जन करने सैर*।
*लौटे घर कुछ लाड़ले, रोग पसारे पैर* ।।
चौपाई--
भारत में भी अब कोरोना । छान रहा है कोना-कोना ।।
धीरे-धीरे पाँव-पसारे । काँप रहे हैं वासी सारे ।।
फैला इसका आज शिकंजा । केरल तक भी इसका पंजा ।।
राजस्थान समूचा आया । महाराष्ट्र पंजाब डराया ।।
सील हुई है सबकी सीमा । फैल रहा विष धीमा-धीमा ।।
नगर-नगर कर्फ़्यू का साया । तालाबंदी कर धमकाया ।।
सड़कें सूनी मार्किट सूना । मरघट सा है शांत नमूना ।।
रेल रुकी है बंद हुई बस । बंद सिनेमा मेले-सरकस ।।
लोग घरों में क़ैदी जैसे । वक़्त गुजारे जैसे-तैसे ।।
बाज़ारों से लोग नदारद । बंद हुई है अब तो संसद ।।
दोहा--
*भारत के सब लोग दें, अपना यह सहयोग* ।
*घर में ही कुछ दिन रहें, ना फैलावें रोग* ।।
चौपाई--
हाथ सफ़ाई से सब धोना । दूर भगाना है कोरोना ।।
मास्क लगावो मुँह पर भाई । घर में राखो साफ़-सफ़ाई ।।
मिलना सबसे नहीं ज़रूरी । मीटर भर की राखो दूरी ।।
छोड़ो अब तुम हाथ मिलाना । नमस्कार कर अब मुस्काना ।।
सामाजिक संपर्क हटाओ । रिश्ते रहकर दूर निभावो ।।
घर में ख़ुद को क़ैद करो अब । अलग रहें तो बच जाएं सब ।।
साबुन ही हथियार हमारा । कोरोना से जिसने तारा ।।
कोरोना से बचना है गर । साफ़ रहो सब घर में रहकर ।।
घर का पोष्टिक खाना खाओ । प्रतिरोधकता आप बढ़ाओ ।।
बूढ़ों-बच्चों और जवानों । कोरोना कमज़ोर न जानों ।।
दोहा--
*सारा भारत साथ दे, बाहर जाना बैन* ।
*लोग कड़ी गर ना बनें, टूटे तब यह चैन* ।।
चौपाई--
आओ बहनों आओ भाई । कोरोना से लड़ें लड़ाई ।।
निर्देशों का कर लें पालन । आना-जाना रोकें सब जन ।।
मत करना कालाबाज़ारी । समझो सबकी तुम लाचारी ।।
निर्धन अरु लाचार मिले तो । आप सहारा उसको भी दो ।।
मज़दूरों मज़बूरों की भी । आज मदद तुम करना साथी ।।
हम सबको है मिलकर लड़ना । अफ़वाहों में मत तुम पड़ना ।।
राष्ट्रभक्ति का आया अवसर । अपनी सरहद अपना ही घर ।।
कोरोना योद्धाओं का भी । आज हुआ जन-जन आभारी ।।
डॉक्टर-नर्सें और सिपाही । करो शुक्रिया इनका भाई ।।
विश्व-विजेता हिन्द बनेगा । संकट सारा शीघ्र टलेगा ।।
दोहा --
*कोरोना से ले सबक, यह सारा संसार* ।
*कुदरत से खिलवाड़ का, रोकें अत्याचार*।।
©कृति-महावीर सिंह जोधपुर 9413408422