नफ़ा नुकसान कुछ सोचा नहीं करते
अजी ज़िन्दा अभी ईमान है अपना
बेईमां लोग यूं फाका नहीं करते
धतूरा पी लिया शायद वगरना यूँ
मकीं खुद का मकां लूटा नहीं करते
लिखी थी हार किस्मत में मेरी यारों
वगरना मोतबर धोखा नहीं करते
अमानत में खुदा की हो ख़यानत क्यों
ज़मीरो-रूह को बेचा नहीं करते
अभी'खुरशीद' से जग में उजाला है
दुपहरी में दिये बाला नहीं करते
खुरशीद'खैराड़ी' जोधपुर ०९४१३४०८४२२
युगीन काव्या, जनवरी-जून २०१३